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अष्टाध्यायीसूत्रपाठः
॥ तस्मै पाणिनये नमः ॥
1|1|1 वृद्धिरादैच् SK 16
1|1|2 अदेङ् गुणः SK 17
1|1|3 इको गुणवृद्धी SK 34
1|1|4 न धातुलोप आर्धधातुके SK 2656
1|1|5 क्ङिति च SK 2217
1|1|6 दीधीवेवीटाम् SK 2190
1|1|7 हलोऽनन्तराः संयोगः SK 30
1|1|8 मुखनासिकावचनोऽनुनासिकः SK 9
1|1|9 तुल्यास्यप्रयत्नं सवर्णम् SK 10
1|1|10 नाज्झलौ SK 13
1|1|11 ईदूदेद्द्विवचनं प्रगृह्यम् SK 100
1|1|12 अदसो मात् SK 101
1|1|13 शे SK 102
1|1|14 निपात एकाजनाङ् SK 103
1|1|15 ओत् SK 104
1|1|16 सम्बुद्धौ शाकल्यस्येतावनार्षे SK 105
1|1|17 उञः SK 106
1|1|18 ऊँ SK 107
1|1|19 ईदूतौ च सप्तम्यर्थे SK 109
1|1|20 दाधा घ्वदाप् SK 2373
1|1|21 आद्यन्तवदेकस्मिन् SK 348
1|1|22 तरप्तमपौ घः SK 2003
1|1|23 बहुगणवतुडति संख्या SK 258
1|1|24 ष्णान्ता षट् SK 369
1|1|25 डति च SK 259
1|1|26 क्तक्तवतू निष्ठा SK 3012
1|1|27 सर्वादीनि सर्वनामानि SK 213
1|1|28 विभाषा दिक्समासे बहुव्रीहौ SK 292
1|1|29 न बहुव्रीहौ SK 222
1|1|30 तृतीयासमासे SK 223
1|1|31 द्वन्द्वे च SK 224
1|1|32 विभाषा जसि SK 225
1|1|33 प्रथमचरमतयाल्पार्धकतिपयनेमाश्च SK 226
1|1|34 पूर्वपरावरदक्षिणोत्तरापराधराणि व्यवस्थायामसंज्ञायाम् SK 218
1|1|35 स्वमज्ञातिधनाख्यायाम् SK 219
1|1|36 अन्तरं बहिर्योगोपसंव्यानयोः SK 220
1|1|37 स्वरादिनिपातमव्ययम् SK 447
1|1|38 तद्धितश्चासर्वविभक्तिः SK 448
1|1|39 कृन्मेजन्तः SK 449
1|1|40 क्त्वातोसुन्कसुनः SK 450
1|1|41 अव्ययीभावश्च SK 451
1|1|42 शि सर्वनामस्थानम् SK 313
1|1|43 सुडनपुंसकस्य SK 229
1|1|44 न वेति विभाषा SK 24
1|1|45 इग्यणः सम्प्रसारणम् SK 328
1|1|46 आद्यन्तौ टकितौ SK 36
1|1|47 मिदचोऽन्त्यात्परः SK 37
1|1|48 एच इग्घ्रस्वादेशे SK 323
1|1|49 षष्ठी स्थानेयोगा SK 38
1|1|50 स्थानेऽन्तरतमः SK 39
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