॥ अथ महाराजाधिराजभोजराजविरचितं सरस्वतीकण्ठाभरणम् ॥
प्रणम्यैकात्मतां यातौ प्रकृतिप्रत्ययाविव । श्रेयःपदमुमेशानौ पदलक्ष्म प्रचक्ष्महे ॥
अ इ उ ण् ॥ ऋ ऌ क् ॥ ए ओ ङ् ॥ ऐ औ च् ॥ ह य व र ल ण् ॥ ञ म ङ ण न म् ॥ झ भ ञ् ॥ घ ढ ध ष् ॥ ज ब ग ड द श् ॥ ख फ छ ठ थ च ट त व् ॥ क प य् ॥ श ष स र् ॥ ह ल् ॥
॥ इति महाराजाधिराजभोजराजविरचितं सरस्वतीकण्ठाभरणम् ॥