॥ तस्मै पाणिनये नम: ॥

अष्टाध्यायी - कृदन्तसूत्रकोशः

सर्वाणि कृदन्तप्रकरणसूत्राणि
  (अ)
अङ्   (अ)
अच्   (अ)
अण्   (अ)
अतृन्   (अत्)
अथुच्   (अथु)
अध्यै   (अध्यै)
अध्यैन्   (अध्यै)
अनि   (अनि)
अनीयर्   (अनीय)
अप्   (अ)
असे   (असे)
असेन्   (असे)
आरु   (आरु)
आलुच्   (आलु)
इञ्   (इ)
इत्र   (इत्र)
इनि   (इन्)
इनुण्   (इन्)
इन्   (इ)
इष्णुच्   (इष्णु)
  (उ)
उकञ्   (उक)
ऊक   (ऊक)
एश्   (ए)
  (अ)
कञ्   (अ)
कध्यै   (अध्यै)
कध्यैन्   (अध्यै)
कप्   (अ)
कमुल्   (अम्)
कसुन्   (अस्)
कसेन्   (असे)
कानच्   (आन)
कि   (इ)
किन्   (इ)
कुरच्   (उर)
केन्   (ए)
केन्य   (एन्य)
केलिमर्   (एलिम)
क्त   (त)
क्तवतु   (तवत्)
क्तिच्   (ति)
क्तिन्   (ति)
क्त्रि   (त्रि)
क्त्वा   (त्वा)
क्नु   (नु)
क्मरच्   (मर)
क्यप्   (य)
क्रु   (रु)
क्लुकन्   (लुक)
क्वनिप्   (वन्)
क्वरप्   (वर)
क्वसु   (वस्)
क्विन्   (०)
क्विप्   (०)
क्से   (से)
खच्   (अ)
खमुञ्   (अम्)
खल्   (अ)
खश्   (अ)
खिष्णुच्   (इष्णु)
खुकञ्   (उक)
ख्युन्   (अन)
ग्स्नु   (स्नु)
  (अ)
घञ्   (अ)
घिनुण्   (इन्)
घुरच्   (उर)
ङ्वनिप्   (वन्)
चानश्   (आन)
ञ्युट्   (अन)
  (अ)
टक्   (अ)
  (अ)
डु   (उ)
  (अ)
णच्   (अ)
णमुल्   (अम्)
णिनि   (इन्)
ण्यत्   (य)
ण्युट्   (अन)
ण्वि   (०)
ण्विन्   (०)
ण्वुच्   (अक)
ण्वुल्   (अक)
तवे   (तवे)
तवेङ्   (तवे)
तवेन्   (तवे)
तवै   (तवै)
तव्य   (तव्य)
तव्यत्   (तव्य)
तुमुन्   (तुम्)
तृच्   (तृ)
तृन्   (तृ)
तोसुन्   (तोस्)
त्वन्   (त्व)
थकन्   (थक)
नङ्   (न)
नजिङ्   (नज्)
नन्   (न)
मनिन्   (मन्)
यत्   (य)
युच्   (अन)
  (र)
रु   (रु)
ल्यप्   (य)
ल्यु   (अन)
ल्युट्   (अन)
वनिप्   (वन्)
वरच्   (वर)
विच्   (०)
विट्   (०)
वुञ्   (अक)
वुन्   (अक)
  (अ)
शतृ   (अत्)
शध्यै   (अध्यै)
शध्यैन्   (अध्यै)
शानच्   (आन)
शानन्   (आन)
षाकन्   (आक)
ष्ट्रन्   (त्र)
ष्वुन्   (अक)
से   (से)
सेन्   (से)
डर   (अर)
इकवक   (इकवक)
  (य)
कृत्प्रक्रियाविधिः अत्र दृश्यताम् ।